शिक्षा के साथ , जनहित सरोकार ,

हमें अब इस बाजार वादी युग में ग्राहक बनाने की आदत हो गई है , या यूँ कहें तो गलत नहीं होगा की हमें हर चीज के लिए ग्राहक बनने  पर मजबूर किया जा रहा है , चाहे वह चीज हमारे उपयोग की हो या ना हो , फिर भी हम उस चीज को पाने में या उससे जुड़ने में अपने आप को विशेष समझने लगते हैं,
इसी प्रकार का एक महत्वपूर्ण मामला शिक्षा का है , हमारे यहां आप की जेब के हिसाब से कई प्रकार के स्कूल पाए जाते हैं , जहां १0000 रुपये में भी शिक्षा मिलती है और १००००० एक लाख में भी , आखिर फर्क क्या है , केवल कुछ दिखावे का और कुछ सुविधाओं का ,
पर हमने यह कभी नहीं सोचा की शिक्षा एक ऐसा संस्कार है जिसे हर माता पिता एवं पालक अपने बच्चों को अनिवार्य रूप से अपनी सामर्थ्य के अनुसार दिलाने की कोशिश करते हैं , और अपने जीवन की पूजी का एक बड़ा हिस्सा अपने बच्चों की शिक्षा पर पर खर्च कर देते हैं , जो एक औसत किश्म के स्कूल में ४० से ८० हजार के बीच में हो सकता है , और यही रकम हमें अपने हर बच्चे पर हर साल खर्च करना होती है , और टूशन खर्च अलग , पर स्कूलों की ओर से हमें कोई रियायत नहीं दी जाती जवकि वह स्कूल संचालक हमारे ही जैसे पेरेंट्स से कई तरह के शुल्क बसूल कर हमारे ही द्वारा दिए गए धन से कई इमारते बना डालते हैं और हम मात्र ग्राहक बने एक स्कूल से दूसरे और दूसरे स्कूल से तीसरे स्कूल मे अपने बच्चौ का भविष्य तलासते रहते हैं,
बच्चों की शिक्षा का कार्य एक ऐसा कार्य है जो हमे और हमारे आने बाली सभी पीड़ियों को करना ही है , तो इसके किए हम बार बार किसी के ग्राहक क्यों बने और क्यों उनके भवन बनाने के लिए अपना पैसा खर्च करे , उसपैसे को हम अपने बच्चौ के बेहतर भविष्य के लिए क्यों ना बचा कर रखें ,
करना क्या है —- जनहित सरोकार सोसाइटी के द्वारा यह विचार लाया गया है की अगर  मध्यम जनसंख्या वाले शहर मे कम से कम 1000 से अधिक परिवार प्रति सीट 10-10 हजार रुपये का अंश दान देकर एक उच्च स्तरीय स्कूल की स्थापना मे सहयोग देकर उसके आजीवन संस्थापक सदस्य बन कर अन्य समकक्ष स्कूल से 50 प्रतिसत कम फीस मे ही अपने बच्चे एवं परिवार के आने वाले बच्चो की बेहतर एवं कम खर्चीली शिक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं , यह एक ऐसा कार्य है जो हर किसी को अनिवार्य रूप से करना ही है , तो फिर इसके लिए हम बार बार किसी के ग्राहक क्यों बने , और क्यों अपनी मेहनत की कमाई की फिजूल खर्ची करें , क्यों ना अपनी आनेवाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और कम खर्चीली शिक्षा की व्यवस्था करें , नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब महंगी शिक्षा के चलते मध्यम और निम्न आय वाले माता पिता पालकों के बच्चे निम्न स्तरीय शिक्षा तक ही सीमित रह जावेगे
कृपया जल्द मिलें और इस जनहित के कार्य मे हाथ बटाये, सहयोगी बने , संस्था से जुड़कर इसी प्रकार के सामूहिक कार्यों के लिए जनसहयोग जुटाने मे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ , और सहयोगी बने , whatsapp नंबर 8435275733

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